Gautam Buddha Quotes and Biography in Hindi

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क्या आप मन की शांति चाहते हैं ? क्या आप success होना चाहते हैं ? आज Gautam Buddha Quotes and Biography in Hindi बताऊंगा, मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप लोगो को success जरुर मिलेगा |

आप लोग Gautam Buddha Quotes and Biography in Hindi को बड़े ही ध्यान से पढ़िए और एक एक पॉइंट को समझने की कोशिस कीजिये और फिर उस पॉइंट को अपनी जिन्दगी में use कीजिये, इसके बाद आप लोगो को सफल होने से कोई भी रोक नही सकता |

क्योकिं Gautam Buddha Quotes and Biography पढ़ने के बाद आप लोगो को एक अलग ही फीलिंग का अहसास होगा, आप लोगो को सही रास्ता मिल जाएगा, इस पोस्ट को अच्छे से पढ़ने के बाद और उस पॉइंट को फॉलो करने के बाद, सच्चे दिल से मेहनत करने के बाद अपने सपने को पुरे कर सकते हैं |

इस दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो Gautam Buddha Quotes in Hindi, Quotes by Gautam Buddha, Teachings of Gautam Buddha in Short पढ़ने के बाद सफल हुए हैं |

तो चलिए दोस्तों Gautam Buddha Quotes and Biography की शुरुआत करते हैं और अपने जीवन में शांति लाने की कोशिश करते हैं |


Gautam Buddha Quotes and Biography in Hindi

गौतम बुध्द का बचपन 

वर्षों पूर्व उत्तर भारत के एक छोटे राज्य में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया को जीवन के वास्तविक सुख से परिचित करवाया, कपिलवस्तु के दयालु राजा शुद्धोधन की पत्नी रानी माया ने एक खूबसूरत सपना देखा जिसमें एक सुंदर श्वेत कक्ष दैविक प्रकाश में तैरता हुआ रानी की तरफ आया और उनके गर्भ में समा गया,

राजगुरु ने बताया कि इस शुभ स्वप्न का अर्थ है कि महारानी एक पुत्र को जन्म देंगी जो आगे चलकर महान बनेगा और पूरी दुनिया उसकी महानता से प्रेरणा लेगा, ये सुनकर राजा रानी अत्यंत प्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें राज्य भार संभालने के लिए एक युवराज की ही प्रतीक्षा थी,

कुछ महीनों के बाद जब रानी माया एक बहुत ही सुंदर उद्यान लुंबिनी से गुजरती हुई कपिलवस्तु की ओर लौट रही थी तभी उन्हें एक अद्भुत प्रसन्नता की अनुभूति हुई और उन्होंने प्रकृति की गोद में ही अपने पुत्र को जन्म दिया और उस बालक के तेज से सारा वातावरण मंगलमय हो उठा |

राजकुमार का नाम सिद्धार्थ रखा गया और उनके दर्शन करने लिए कपिलवस्तु में देश-प्रदेश से कई लोग आए, जिनमें एक वृध्द महापुरुष संत भी शामिल हुए जिन्होंने राजा रानी को बताया कि सिद्धार्थ बड़ा होकर एक महान राजा बनेगा और उन्होंने यह भी बताया कि यदि उसने राजा ना बनने का निर्णय लिया तो उसका भविष्य और भी स्वर्णिम होगा,

वह संसार के दुखों को देखकर वैराग्य अपनायेगा और एक शांतिपूर्ण और प्रेम पूर्ण जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करेगा |यह सुनकर राजा शुद्धोधन ने सोचा कि मैं यही चाहूंगा कि मेरा पुत्र राज्य भारी ही संभाले और एक महान राजा बने ना कि एक वैराग्य पूर्ण जीवन बिताएं,

इसलिए उन्होंने सभी को यह कहलवाया दिया कि राजकुमार को कभी भी जीवन के दुखों के बारे में पता नहीं चलना चाहिए, और उनकी दिनचर्या मोह माया से परिपूर्ण रहनी चाहिए, सिद्धार्थ के जन्म के कुछ दिनों के बाद ही रानी माया का देहांत हो गया जिसके बाद रानी गौतमी ने उनका पालन पोषण किया और भरपूर प्रेम के साथ उन्हें बड़ा किया |

इसी कारण से सिद्धार्थ को गौतम के नाम से भी जाना गया, सिद्धार्थ ने गुरुकुल में सदा ही अपनी बुद्धिमानी का उदाहरण दिया, वे बचपन से ही शांत, सहनशील एवं दयावान थे, उनके मन में किसी के लिए कोई भी बैर नहीं था, वह सभी को बराबर मानते थे |

एक बार सिद्धार्थ बगीचे में बैठे थे, तभी उनके चचेरे भाई देवदत्त ने तीर से एक उड़ते हुए हंस को मार गिराया, सिद्धार्थ यह देखते ही हंस की ओर भागे जो घाव के बावजूद भी जीवित था लेकिन तड़प रहा था, उन्होंने हंस के की चोट पर मरहम लगाया और उसे प्यार से पुकारते हुए कुछ करते हुए शांत कराया,

देवदत्त ने आकर यह देखा तो वह क्रोधित हो उठा और कहने लगा कि यह हंस तो मेरा हैं लेकिन सिद्धार्थ ने ऐसी अवस्था में देवदत्त को हंस देने से मना कर दिया, अंततः वे दोनों राज्य सभा में गए और महाराज से प्रश्न किया कि आखिर ये हंस है किसका ?

राजा ने जब राजगुरुओ से पूछा तो उन्होंने यही कहा कि रक्षक भक्षक से बड़ा होता है अर्थात बचाने वाले का हक मारने वाले से हमेशा अधिक होता है राजकुमार की यही संवेदनशीलता देख कर देखकर राजा को डर भी लगता था कि कहीं सचमुच ऋषि के कथन अनुसार वे राजमहल छोड़कर बैरागी ना बन जाए |

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गौतम बुध्द का युवावस्था

गौतम बुध्द का 16 वर्ष की आयु में ही गणराज्य की राजकुमारी यशोधरा के साथ उनका विवाह करवा दिय, विवाह के कुछ वर्ष उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई इसका नाम राहुल रखा गया, समस्त राज्य में जहां पुत्र जन्म की खुशियां मनाई जा रही थी राजकुमार सिद्धार्थ इस बात की चिंता थी कि इस खुशी के अवसर पर भी उन्हें शांति प्राप्त क्यों नहीं थी |

उन्होंने महाराज से विनती करी की उन्हें नगर दर्शन की अनुमति दी जाए, राजा ने अनुमति तो दे दी लेकिन यह भी कहलवा दिया कि राजकुमार के मार्ग में केवल प्रसन्नचित और स्वस्थ प्रजा ही दिखाई देनी चाहिए, किंतु होनी को कौन टाल सकता था |

जब राजकुमार नगर दर्शन के लिए निकले तो उन्हें रास्ते में चार दृश्यों का दर्शन हुआ एक वृध्द पुरुष, एक कुष्ट रोग से पीड़ित, एक शव जिन्हें दाह संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था और एक संत महात्मा शरीर से कमजोर दिख रहे थे लेकिन उनके मुख पर एक अद्भुत शांति भाव थी |

उन्होंने जब सारथी से इन दृश्यों के बारे में पूछा तो उसने यही कहा कि हे राजकुमार मृत्यु, रोग और आयु इन तीन चीजों पर तो किसी का वश नहीं है यह तो किसी को भी हो सकती है, राजकुमार यह सुनकर चिंतित हो उठे और उन्होंने यह पूछा कि क्या इस दुख से एक दिन मुझे यशोधरा और मेरे पुत्र को भी गुजरना होगा,

तब सारथी ने थोड़ा झिझकते हुए सर हिलाए, दुखी राजकुमार ने सारथी से फिर पूछा कि यह संत महात्मा वृध्द और कमजोर होने के बावजूद इतने शांत और प्रसन्नचित क्यों दिखाई दे रहे हैं ? सारथी ने कहा कि यह तो उसे नहीं पता, लेकिन संत साधु जीवन के सत्य ढूंढने के उद्देश्य से ही तपस्या करते है,

और अपने तन मन को उसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए समर्पित कर देते हैं, उस दिन की यात्रा ने सिद्धार्थ को वैराग्य मार्ग की तरफ मोड़ दिया, उस दिन की यात्रा ने सिद्धार्थ के मन में कई प्रश्न उठे और वह उन सभी प्रश्न का हल जानना चाहता था |

गौतम बुध्द की जीवन ज्ञान की खोज में निकलना / मन की शांति

फिर एक रात उसने अपने पुत्र और पत्नी को सोता हुआ छोड़ कर गृह त्याग कर जीवन ज्ञान की खोज में निकल जाने का बहुत ही कठिन निर्णय लिया, ऐसा निर्णय जो एक आम आदमी शायद ही ले सकता हैं, उसने मोह माया त्याग कर मन की शांति के लिए निकल पड़ा,

उन्होंने कई वनों का भ्रमण किया और संत महात्माओं से जीवन के सत्य के बारे में प्रश्न किये, वे निरंजना नदी के किनारे उर्वाले नामक एक वन में भी गए जहां उनकी भेंट पांच तपस्यों से हुई, जिनके साथ उन्होंने भी कठोर तप की किया |

इस सबके बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिले, अंततः सिद्धार्थ “गया” आए और वहां एक वट वृक्ष के नीचे बैठकर उन्होंने प्रतिज्ञा की जब तक ज्ञान प्राप्त नहीं होगा वे वहां से नहीं हटेंगे, सात दिन और 7 रात तक निरंतर समाधिस्त रहने के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की अनुभूति हुई |

इस घटना को “संबोधि” कहा गया, उस वृक्ष को “बौधि” वृक्ष के नाम से जाना गया तथा गया को “बौधगया” का नाम दिया गया, सिद्धार्थ गौतम को भी इस दिन के बाद “महात्मा गौतम बुध”  का नाम मिला, ज्ञान प्राप्ति के पश्चात उन्होंने बनारस के निकट सारनाथ में पूर्व 5 सन्यासी साथियों को उपदेश दिए,

महात्मा बुध्द आजीवन नगरों में घूम घूमकर अपने विचारों को प्रसारित करते रहे, एक बार वन भ्रमण करते हुए उनकी मुलाकात अंगुलिमाल डाकू से हुई, जो बहुत ही खूंखार डाकू था, उसने महात्मा बुद्ध को जान से मारने की धमकी देते हुए रुकने को कहा,

महात्मा बुद्ध ने बड़े ही शांत स्वाभाव से कहा मैं तो रुक जाऊंगा तू कब रुकेगा, इसके बाद अंगुलिमाल डाकू डर गया और सोचा यह कैसा मानव है जिसे मृत्यु से भी भय नहीं, वे उनके पैरों में गिर गया और उनका शिष्य बनने की विनती की, बुध्द ने सहस उसे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया |

महात्मा बुध्द कुछ समय बाद कपिलवस्तु भी गए जहां उनकी पत्नी, पुत्र और अनेक लोग भी उनके शिष्य बन गये, उनके उपदेशों का प्रचार सबसे ज्यादा प्रचार “सम्राट अशोक” ने किया और “भीमराव अंबेडकर” भी बौद्ध धर्म के अनुयाई थे, 80 वर्ष की आयु में उनकी पावन आत्मा मानव शरीर को छोड़कर ब्रह्मांड में लीन हो गई इस घटना को महापरिनिर्मान कहा गया |

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“Gautam Buddha Quotes and Biography in Hindi”

Gautam Buddha Thoughts / Buddha Updesh 

बुध्दम सरनम गच्छामि यानि हम बुध्द की शरण में जाते है और बुध्द की शरण में जाने का अर्थ है जिंदगी की सच्चाई, जीवन जीने का एक सकारत्मक मार्ग, इंसान बुराइयों की ओंर जाने से बचता है और सही मार्ग में जाता है वह मार्ग से नहीं भटकता है,

बुध्द का मतलब है जागृत या ऐसा व्यक्ति जिसने आत्म ज्ञान प्राप्त कर लिया हो, बुध्द का मार्ग सच्चे अर्थो में धर्म का मार्ग हैं, निश्चित रूप से गौतम बुध्द का विचार इंसान का भटकाव रुककर जीवन जीने का सही मार्ग दिखाता हैं, साथ ही सफल, सुखी,स्वस्थ और समृद्ध जीवन जीने की ओर ले जाता हैं,

इस पोस्ट में गौतम बुध्द के उन विचारो के बारे में बताऊंगा जो आपके हर समस्या का समाधान करेंगे, बुध्द के विचार हमे गलत रास्ते में जाने से रोकता है जीवन जीने का तरीका पता चल जाता है बुध्द के विचार से हमे जिंदगी के लक्ष्य के बारे में पता चलता है बुध्द के विचार से कई लोगो ने सफलता पाई है,

महात्मा बुध्द के विचार से हमे प्रेरणा मिलती है जिंदगी में आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है तो चलिए दोस्तों आज हम आपको बुध्द के कुछ success रूल्स के बारे में बताते है जिन्हें जानकर आप भी success हो सकते है |

सोच समझ कर फैसला ले 

यदि आपको success पानी है तो आपको सोच समझ कर फैसला लेना होगा यदि बिना सोचे समझे फैसले लेंगे तो आप कभी सफल नहीं हो पाओगे किसी भी चीज पर आप इसलिए विश्वास मत करो की बहुत से लोगो से सुना हु बहुत से लोग बोलते है कि आप ये कोर्स कर लो या ये बिजनेस कर लो क्योकि ये मैंने किया है तो मुझे सफलता मिली है

आपको दूसरो की बात पर नहीं आना है आपको अपना फैसला खुद लेना है, किसी भी चीज पर इसलिए विश्वास मत करो की ये आपकी परम्पराये है आपकी सोच और विचार जानने के बाद ही अपना फैसला बताये यदि आपको लगता है कि ये बाते सही है तो आप ये बात अन्य दुसरे लोगो को बताये,

यदि आपने एक गलत फैसला ले लिया तो आप success नहीं हो पाओगे आप बाद में पछताओगे इसलिए आप ऐसा फैसला ले जिससे दूसरे लोगो को लाभ मिले |

मेहनत के बिना कुछ नहीं मिलता

यदि आप आलसपन और कामचोरी करोगे तो आप जीवन में भी सफल नहीं हो पाओगे आप आप आलसपन करोगे तो बर्बाद हो जाओगे आपको सिर्फ निराशा ही मिलेगी इस दुनिया में सोचने से कुछ नहीं मिलता यदि आप मूर्खो कि तरह सोचते रहोगे और कुछ काम नहीं करोगे तो आप बर्बाद हो जाओगे यदि आपको कामयाबी चाहिये तो मेहनत करनी पड़ेगी |

इस दुनिया में सोचने से कुछ नहीं मिलता यदि आपको जिन्दगी में आगे बढ़ना है तो action लेना होगा मेहनत के बिना आपको कुछ नहीं मिलेगा जितना ज्यादा मेहनत करोगे सफलता मिलती जाएगी इस दुनिया में जितने भी महान लोग है उसने कठिन परिश्रम किया है तब जाके सफलता मिली है |

खुश रहना है तो अच्छा सोचे

हम अपने विचारों से ही बंधे हुए है हम जैसे सोचते है वैसा हमारा शरीर काम करता है जब हम खुश रहते है तो तब हम ऐसे सोचते है जैसे हमे सब कुछ मिल गया है ख़ुशी हमारे छाये की तरह पीछा करती है हमारे आसपास का माहौल हमे अच्छा लगता है हमे परम आनंद प्राप्त होता है |

इंसान को हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये ताकि वो हर कठिन से कठिन समय में अपना संयम बनाये रखे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते रहे अच्छी सोच हमे अच्छे कार्य कराती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है इसलिए महात्मा बुध्द कहते है कि आप अच्छा सोचे ख़ुशी आपको जरुर मिलेगी |

आज में जिए

महात्मा बुध्द कहते है कि यदि आपको जीवन में सफलता चाहिये तो अतीत के बारे में कभी ना सोचे और ना ही भविष्य के बारे में क्योकि बीते हुए कल वापस आ नहीं सकता और भविष्य आप देख नहीं सकते, अपने मन को हमेशा वर्तमान में ध्यान केन्द्रित करे आप जो भी सोचे present मोमेंट के बारे में ही सोचे |

यदि आप आज में जिओगे तो आपको सफलता जरुर मिलेगी भविष्य जो होगा वो देखा जायेगा इसलिए आज में जियो अक्सर हम बिता हुआ कल और भविष्य के बारे में सोचकर परेशान रहते है जबकि आज ही सत्य है जो कुछ भी होगा आज ही होगा |

“जैसा कर्म आज करोगे वैसा ही फल आपको कल मिलेगा यदि आप अपना आज सही कर ले तो हमारा भविष्य अपने आप सही हो जायेया और हमें जिस ख़ुशी की तलाश है वो ख़ुशी मिल जायेगी”

अच्छी संगंती में रहे

एक खूंखार जंगली जानवर से खतरनाक कपटी लोग और बुरी संगती वाले होते है एक जानवर तो हमारे शरीर पर वार करता है लेकिन कपटी लोग हमारे मन पर वार करता है और ऐसा वार करते हैं जो हमारी जिन्दगी पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं |

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“Gautam Buddha Quotes in Hindi”

Gautam Buddha Best Quotes of Gautam Buddha

“यदि पवित्र मन के साथ कोई व्यक्ति बोलता या काम करता हैं, तो कभी ना जाने वाली परछाई की तरह खुशी उसका पीछा करती हैं” 

“yadi pavitra mn ke sath koi vykti bolta ya kam karta hai, to kabhi na jane wali parchhai ki tarah khushi uska pichha karti hai”.

“यदि आप वास्तव में स्वयं से प्रेम करते हैं तो कभी भी किसी को ठेस नहीं पहुंचा सकते” 

“yadi aap vastav me swaym se prem karte hai to kabhi bhi kisi ko thes nhi phuncha skte”.

“आपका एक क्षण एक दिन को बदल सकता हैं, एक दिन एक जीवन को बदल सकता हैं और एक जीवन पुरे विश्व को बदल सकता हैं” 

“aapka ek chhan ek din ko badl skta hai, ek din ek jivan ko badl skta hai aur ek jivan pure vishav ko badl skta hai”.

“चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ ले या बोल ले, ये शब्द आपका भला तब तक नहीं करेंगे, जब तक आप इनको उपयोग में नहीं लाते हैं” 

“chahe aap jitne pavitra shabd padh le ya bol le, ye shabd aapka bhla tb tk nhi krenge, jb tk aap inko upyog me nhi laate hai”.

“सत्य के मार्ग पर चलता हुआ व्यक्ति केवल दो ही गलतियाँ कर सकता हैं – या तो पूरा रास्ता तय ना करना, या तो शुरुआत ही ना करना” 

“saty ke maarg pr chlta hua vykti keval do hi galtiyaa kr skta hai – ya to pura rasta tay na karna, ya to shuruat hi na karna”.


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