Happy Diwali Wishes in Hindi | क्यों मनाया जाता है दिवाली का पर्व

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Happy Diwali Wishes in Hindi दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है इस दिन भगवान श्री राम, माता सीता एवं लक्ष्मण जी के साथ 14 वर्ष के वनवास की समाप्ति के पश्चात अयोध्या वापस आए थे | दशहरे के दिन से ही अयोध्या वासियों ने अपने घरों को रंगोलियों से एवं पूरी अयोध्या को दीपों से सजा दिया |

ये प्रथा आज भी ऐसे ही कायम है दिवाली 5 दिनों तक चलने वाला त्यौहार है और इसके हर दिन का एक अलग महत्व है | तो चलिए आज जानते हैं दिवाली के इन पांचो दिनों के बारे में | दिवाली का पहला दिन है धनतेरस

दिवाली का पहला दिन है धनतेरस ( Dhanteras 2020 )

Happy Dhanteras 2020इस पोस्ट में हम जानेंगे की धनतेरस पर्व का क्या महत्त्व है और इसे क्यों मनाया जाता है और इस Diwali 2020 में Dhanteras Kab Hai ? और Dhanteras Muhurat, Dhanteras Puja Vidhi के बारे में |

धनतेरस सनातन धर्म का एक प्रमुख त्योहार है लेकिन “धनतेरस क्यों मनाया जाता है?” “इस पर्व की कथा क्या है?” “धनतेरस मनाने का उद्देश्य क्या है?” यह बहुत कम लोगों को ज्ञात है प्रायः लोग इस दिन धन बढ़ाने के लिए कई उपाय करते हैं | इस लेख में हम वह उपाय भी बताएंगे | Dhanteras wishes in Hindi

धनतेरस के दिन अधिकांश लोग सोना, चांदी के आभूषण अथवा बर्तन खरीदते हैं लेकिन “क्या कारण है?” इस विषय में इस लेख में विस्तार से जानेंगे | सबसे पहले समझते हैं “धनतेरस पर्व त्यौहार मनाने का कारण क्या है?

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है इस दिन समुद्र मंथन के समय हाथों में अमृत कलश लिए हुए भगवान विष्णु ही धनवंतरी रूप में प्रकट हुए थे | इस विषय में विस्तार से पुराणों में कहा गया श्रीमद्भागवत पुराण कि:-

उनके हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश था |

वह साक्षात विष्णु भगवान के अंशांश अवतार थे |

वे ही आयुर्वेद के प्रवर्तक (जनक) और

यज्ञ भोक्ता धनवंतरी नाम से प्रसिद्ध हुए |

ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्रीकृष्ण ने कहा कि:-

भगवान धन्वंतरी स्वयं महान पुरुष है और साक्षात्

नारायण के अंश स्वरुप है | पूर्वकाल में जब समुद्र

का मंथन हो रहा था, उस समय महासागर से

उनका प्रादुर्भाव हुआ |

अर्थात भगवान विष्णु के धनवंतरी रूप में प्रकट होने पर यह धनतेरस का पावन पर्व मनाया जाता है |

भगवान धनवंतरी आयुर्वेद के जनक और वैद्य के रूप में जाने जाते हैं | यहां पर एक और बात का ध्यान रहे आयुर्वेद के जनक का मतलब यह नहीं है कि धनवंतरी जी ने आयुर्वेद के नियमों को बनाया था, उनका निर्माण किया था, ऐसा नहीं है भगवान धनवंतरी जी ने आयुर्वेद को प्रकट किया था | जैसे

“अनेक संतों के मत तथा वेद-पुराण के प्रमाणों द्वारा हम वेदों शास्त्रों के सिद्धांत को आप लोगों के समक्ष रखते हैं हम उन सिद्धांतों को बनाते नहीं हैं वैसे ही भगवान धनवंतरी जी ने आयुर्वेद को प्रकट किया | यह आयुर्वेद वेद का ही अंश है वेद का ही भाग है अर्थात आयुर्वेद उपवेद है |”

चुकी भगवान धनवंतरी जी आयुर्वेद के जनक कहे जाते हैं और धनतेरस उनके प्रकट होने का दिवस है | इसलिए 2016 में भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया |

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इस साल धनतेरस का पर्व 13 नवंबर दिन सोमवार को मनाया जायेगा Dhanteras Parv से जुडी कुछ अनसुने पौराणिक कथाए है जिसे हम आपको विस्तार से बता रहे है जो आपको बहुत ही पसंद आयेगा |

धनतेरस से जुड़ी कुछ प्रथाए है कि हमें वह करनी चाहिए या नहीं इस विषय में थोड़ा समझते हैं :-

धनवंतरी जी जब प्रकट हुए तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था वे कलश लेकर प्रकट हुए थे अतः इस अवसर पर लोग बर्तन क्रय करते हैं बर्तन खरीदते हैं, परंतु यह प्रथा हमें नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस प्रथा का कोई मतलब नहीं है भगवान धनवंतरी जी कलश लेकर प्रकट हुए इसलिए हम भी बर्तन लेकर प्रकट हो यह बात उचित नहीं है |

वैसे वर्तमान में लोग इस आशय से बर्तन क्रय नहीं करते हैं, वे धन वृद्धि के लिए क्रय करते हैं इसके अलावा सोने-चांदी के आभूषण अथवा बर्तन क्रय करते हैं उनके धन में वृद्धि हो किंतु यह सब करना सही नहीं है |

वास्तव में यह दिवस धनवंतरी जी तथा आयुर्वेद के लिए है आयुर्वेद में धन शब्द का अभिप्राय है “स्वास्थ्य” से लेकिन जिन लोगों को आयुर्वेद के विषय में ज्ञात नहीं है उनके सिद्धांतों के बारे में ज्ञात नहीं है वे धन को मुद्रा समझते हैं इसलिए वे अज्ञानता वश अर्थ का अनर्थ कर रहे हैं |

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जहां स्वास्थ्य धन की वृद्धि करनी चाहिए उसके लिए प्रयत्न करना चाहिए वहां लोग आर्थिक धन की वृद्धि के उपाय में लगे हैं आयुर्वेद अनुसार सोना, चांदी के बर्तन में खाने से स्वास्थ्य धन की वृद्धि होती है लेकिन लोगों ने आर्थिक धन की वृद्धि होती है ऐसा समझ लिया और सोने चांदी के आभूषण तथा बर्तन क्रय करने लगे |

धनतेरस मनाने का प्रमुख उद्देश्य

तो धनतेरस पर्व मनाने का उद्देश्य आयुर्वेद के सिद्धांत को समझना और स्वस्थ रहना है स्वस्थ शरीर से लक्ष्य प्राप्ति में आसानी होती है अगर आप बुद्धिमान ज्ञानवान होना चाहते हैं तो शरीर का स्वस्थ होना आवश्यक है अन्यथा अगर शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा तो कहीं यहाँ दर्द तो कहीं वहां दर्द रहेगा जिससे ध्यान भटकता है |

“आयुर्वेद में सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य को कहा गया है, हमें धन की वृद्धि करनी है तो अपने आप को स्वस्थ रखें |”


आगे और भी है 

दिवाली का दूसरा दिन क्यों है खास और क्यों जलाई जाती है 14 दीप पढ़ने के लिए

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