Happy Diwali Wishes in Hindi | क्यों मनाया जाता है दिवाली का पर्व

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दिवाली का दूसरा दिन है नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi)

Chhoti Diwali

आज हम आपको नरक चतुर्दशी के दिन जलाए जाने वाले दीपक के पीछे की पौराणिक कथा बताने वाले हैं, जिसे आप में से बहुत से लोगों ने पहले नहीं सुना होगा |

दोस्तों आज हम आपको Narak Chaturdashi से जुड़ी 2 पौराणिक कथाये के बारे में जानेंगे उससे पहले हम आपके समक्ष Narak Chaturdashi images भी शेयर करेंगे जो आपको बहुत पसंद भी आएंगे |

Narak Chaturdashi Images

Narak Chaturdashi Images
Narak Chaturdashi Images
Kali Chaudas
Kali Chaudas
narak chaturdashi story
Roop Chaudas

नरक चतुर्दशी की पहली पौराणिक कथा

दोस्तों नरक चतुर्दशी की पहली कथा के अनुसार एक नरकासुर नाम का राक्षस हुआ करता था इस राक्षस ने लगभग 16000 लड़कियों से जबरदस्ती विवाह कर लिया था और इन सभी लड़कियों को अपना सेवक बना लिया था |

नरकासुर इन सभी लड़कियों पर काफी अत्याचार करता था और सदा इनको कैद में रखा था वही नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया था और इस असुर की कैद से लगभग 16000 लड़कियों को मुक्त कराया था |

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जिसके बाद इन कन्याओं ने समाज द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने के डर से आत्महत्या करने की इच्छा जाहिर की इन कन्याओं को आत्महत्या करने से रोकने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने इनको अपना नाम दिया जिसके बाद इन सभी कन्याओं ने भगवान श्रीकृष्ण का आभार प्रकट करने लिए दीप जलाए थे |

तब से नरक चतुर्दशी के दिन दीप जलाने की प्रथा शुरू हो गई और इस दिन लोगों द्वारा दीप जलाए जाने लगे |

नरक चतुर्दशी की दूसरी पौराणिक कथा

नरक चतुर्दशी की दूसरी कथा के अनुसार एक रंतिदेव नामक राजा हुआ करता था | यह राजा सदा लोगों की सेवा करता था और धार्मिक कार्यों में लगा रहता था | एक दिन इस राजा को लेने के लिए यमदूत आ जाते हैं |

राजा यमदूत से कहता है, अभी मेरी आयु ज्यादा नहीं है और मैंने जीवन में कोई गलत काम भी नहीं किया है, तो आप मुझे क्यों लेने के लिए आए हैं ?

यमदूतों ने तब राजा को बताया एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखे पेट ही लौट गया था जिसकी वजह से हम आपको लेने के लिए आए हैं | राजा ने यमदूतों से 1 साल का समय मांगा यमदूतों ने राजा की बात को मान लिया | इस एक साल में राजा कई सारे ऋषियों से मिला और उनसे इस पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा |

ऋषियों ने राजा को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी और व्रत के साथ-साथ ब्राह्मणों को भोजन करवाने को कहा, राजा ने ऋषियों की बात को मानते हुए नरक चतुर्दशी के दिन व्रत रखा और ब्राह्मणों की खूब सेवा की ऐसा करने से राजा को पाप से मुक्ति मिल गई | और नरक लोक की जगह स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई |

तो दोस्तों यह थी नर्क चतुर्दशी की दो पौराणिक कथाएं |


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