Inspirational Story In Hindi | दुविधा में सही निर्णय कैसे ले

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Hello दोस्तो मेरा नाम खुशबू है आज मैं आप लोगो को एक Inspirational Story In Hindi | दुविधा में सही निर्णय कैसे ले, की कहानी बताने जा रही हु जो एक inspiration story है, दोस्तो यह ऐसी कहानी है जो हमारे विचलित मन को शांत कर सकता है साथ ही हमे सही राह भी दिखाता है |

दोस्तो आप भी इस कहानी को बड़े ही ध्यानपूर्वक पढ़े ताकि आप लोगो को सही रास्ता मिल जाय, एक अच्छा निर्णय लेकर हम अपनी जिन्दगी में सफल हो सकते है, तो चलिए दोस्तो Inspirational Story In Hindi | दुविधा में सही निर्णय कैसे ले, की शुरुआत करते है और अपनी जिंदगी को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करते है |


Inspirational Story In Hindi | दुविधा में सही निर्णय कैसे ले

दोस्तों बहुत पहले की बात है एक गांव में एक गरीब किसान रहता था, जिसका नाम मदन था, वह किसानी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था तभी एक साल बारिश नही हुआ और फसल भी नही हुआ, वह बहुत परेशान हो गया मदन अपनी गरीबी से बहुत परेशान हो गया था |

अपनी गरीबी के कारण उसका अपने परिवार का पालन पोषण करना बहुत कठिन हो गया था, एक पत्नी और एक बच्चे का ठीक से वह भरण पोषण नही कर पा रहा था, वह बार बार यही सोचता था कि मैं क्या करूँ, वह हमेशा चिंता में रहता था, इसी सोच के कारण उसने घर परिवार को हमेशा के लिए छोड़कर भाग जाने का फैसला ले लिया |

फिर एक रात वह जब सभी लोग सो रहे थे तो वह चुपके से अपना घर-परिवार छोड़कर चला गया, वो रात में इधर उधर भटक रहा था, वह बिना किसी मंजिल के इधर उधर चले जा रहा था, जब वह भटकते हुए एक नदी के किनारे पहुंचा तो उसने देखा वहां भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ डेरा डाले हुए हैं |

यह देखकर मदन ने भी फैसला किया कि वह भी सन्यासी हो जाएगा और भगवान बुद्ध का शिष्य बन कर उनके साथ ही विचरण करेगा, यह निर्णय लेकर वह भगवान बुद्ध के डेरे में जाकर उनके चरणों में गिर गया और उनसे विनती करने लगा कि हे भगवान बुध्द मुझे भी अपना शिष्य बना लीजिए, मैं आपका शिष्य बनना चाहता हु और आपकी राह पर चलना चाहता हु ।

भगवान बुद्ध ने मदन पर कृपा करके उसे अपना शिष्य बना लिया, उसके बाद जब भगवान बुध्द का काफिला आगे बढ़ा तो वह भी उनके साथ ही चल पड़ा, गर्मी का महीना था भगवान बुद्ध का काफिला चलता चला जा रहा था, बिना रुके भगवान बुध्द के साथ चलता जा रहा था |

जब वह एक जंगल में पहुंचे तो सभी लोग पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुक गए, गर्मी बहुत ज्यादा थी, इसलिए गर्मी के कारण भगवान बुद्ध को काफी जोरो से प्यास लगने लगी, उन्होंने अपने नए शिष्य से कहा यहां पास में सरोवर है तुम जाकर वहां से पानी ले आओ |

भगवान बुध्द का आदेश सुनकर वो सरोवर से पानी लेने चल पड़ा, जब वह सरोवर के पास पहुंचा तो उसने देखा कुछ जंगली जानवर सरोवर में उधम मचा रहे हैं परंतु जब वह सरोवर के पास पहुंचा तो सभी जानवर डर के भाग गए, उस शिष्य ने सरोवर के पास जाकर देखा कि सरोवर का पानी जानवरों के उधम मचाने के कारण काफी गंदा हो गया था |

सरोवर का कीचड़ और सड़े गले पत्ते बाहर उभर कर आ गए थे, इतना गंदा पानी देखकर वह बिना पानी लिए ही वापस आ गया और आकर भगवान बुध्द से बोला भगवान उस सरोवर में तो बहुत ही गंदा पानी था उसे तो पिया ही नहीं जा सकता |

शिष्य की बात सुनकर भगवान बुध्द तो कुछ देर तक कुछ नहीं बोले फिर थोड़ी देर बाद कहा जाओ उसी सरोवर से जाकर पानी ले आओ, भगवान बुध्द का यह आदेश सुनकर वह शिष्य पानी लेने चल पड़ा, परंतु मन में यही सोचता जा रहा था कि भगवान बुध्द इतने गंदे पानी को पिएंगे कैसे ?

फिर जब वह धीरे धीरे चलते हुए उस सरोवर के पास जैसे ही पहुंचा तो वह देखकर हैरान रह गया कि सरोवर का पानी इतना साफ और स्वच्छ कैसे हो गया है ? वह पानी लेकर भगवान बुद्ध के पास आता है और उनसे यह प्रश्न करता है की थोड़ी ही देर में सरोवर का पानी इतना साफ कैसे हो गया ?

हे भगवान कृपया मै तो कुछ समझ ही नही पा रहा हु कृपया मुझे समझाईये आखिर ये सब कैसे हुआ ? तब भगवान बुद्ध ने उसे समझाते हुए कहा की जब सभी जानवर पानी में उधम मचा रहे थे तब उस पानी के अंदर का कीचड़ ऊपर आ गया था लेकिन कुछ समय शांत रहने पर कीचड़ वापस नीचे बैठ गया और पानी फिर से साफ हो गया |

इसी प्रकार हमारे मन की भी स्थिति होती है जीवन की भागदौड़ और कठिनाइयां हमारे मन में उथल-पुथल पैदा कर देती है और तब हम गलत निर्णय ले लेते हैं परंतु कोई भी निर्णय लेने से पहले अगर हम अपने चित्त को शांत रखें और धीरज पूर्वक बैठकर सोचे |

हमारे मन की उथल पुथल भी पानी के कीचड़ की तरह नीचे बैठ जाती है और उस समय हम जो निर्णय लेते हैं वह हमेशा सही ही होता है इसलिए बुरे समय में मनुष्य को अपना संयम बनाये रखना चाहिए और संयम कभी नही खोना चाहिए, शांति से बैठकर सही – गलत का विचार कीजिये फिर निर्णय लीजिये |

भगवान बुद्ध का यह उद्देश्य उसके समझ में आ जाता है और जब वह शांति से बैठ कर सोचता है तो उसे यह आभास हो जाता है कि उसने घर छोड़कर गलत निर्णय लिया था, उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था फिर वह भगवान बुध्द से आज्ञा लेकर अपने घर वापस चला जाता है |


दोस्तों ज्यादातर हमारे डर के कारण और अभी के बारे में ना सोचकर आगे के बारे में सोचकर ही हम परेशान हो जाते है की हमारे साथ आगे क्या होगा ? यह सोचकर ही हम परेशान हो जाते है और कुछ समझ में भी नही आता है की क्या करना चाहिए ? और फिर हम गलत Decision ले लेते है |

दोस्तों अगर आपका मन विचलित, दुविधा में है या आप परेशान हो, तो उस समय कुछ समय के लिए एक शांत जगह चले जाइये और शांति से बैठकर विचार कीजिये की मेरा मन विचलित क्यों है ? फिर कुछ समय बाद आपको अपने सवाल का जवाब मिल जायेगा, फिर उसके बाद आप जो decision लेंगे वो हमेशा Right Decision रहेगा |

तो दोस्तों कैसी लगी आपको आज की हमारी Inspirational Story In Hindi | दुविधा में सही निर्णय कैसे ले, हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजिएगा और साथ ही साथ इस स्टोरी को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिये ।

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