Know why the festival of Dussehra is celebrated? | जान‍िए क्‍यों मनाया जाता है दशहरा का पर्व?

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जान‍िए क्‍यों मनाया जाता है दशहरा का पर्व? Know why the festival of Dussehra is celebrated? दशहरा यानी विजयादशमी, दोस्तों आज मैं दशेरा के बारे में बताने जा रहा हूँ, दोस्तों दशहरा यानी विजयादशमी, विजयादशमी हिंदू द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार त्योहार है, यह त्यौहार चंद्र मास की अक्टूबर को आता हैं |


जान‍िए क्‍यों मनाया जाता है दशहरा का पर्व?

हम लोग इसे विजयदशमी कहते हैं अर्थात् अच्छाई की बुराई पर विजय, बहुत समय पहले एक राक्षस था, जिसका नाम महिषासुर था, जिसका मतलब जंगली भैंसा होता है, बलशाली होने के साथ तीनों लोकों पर राज करने की इच्छा थी |

उसने ब्रह्मा जी की तपस्या की और अपनी इच्छा की पूर्ति की कामना करने लगा, कठिन परिश्रम और तपस्या भूख, प्यास, आंधी करने के पश्चात, ब्रह्मा जी आ प्रकट हुए और उसने भगवान से वरदान मांग लिया कि उसको कोई हरा नहीं सकता कोई मार नहीं सकता और कोई स्त्री उससे लड़ाई में जीत नहीं पाएगी |

वरदान मिलने के पश्चात महिषासुर ने नियंत्रण खो दिया और धरती पर प्रलय मचा दिया, महिषासुर ने धरती पर हाहाकार मचा दिया, और अब तो उसे ब्रह्मा, शिव और विष्णु भी नहीं रोक सकते, फिर सभी देवी देवताओं ने मिलकर महिषासुर को पराजित करने का एक विकल्प निकाला |

विकल्प एक ही था कि कोई स्त्री इसे मार सकती थी इसलिए एक शक्तिशाली स्त्री को भेजा गया और उसका “दुर्गा” नाम था, उसे सारे शस्त्र दिए गए और दो नहीं अट्ठारह हाथों से दुर्गा को लड़ने भेजा गया, विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सम्मानित किया, साथ ही बाकि देवताओं ने भी अपने शस्त्र दिए |

इतने सारे शत्रु के साथ दुर्गा माता को शेर की सवारी भी मिली और दुर्गा माता महिषासुर का वध करने निकली, महिषासुर अपनी तैयारी में सक्षम था, उसने दुर्गा पर सैकड़ों की सेना के साथ वार किये, और दुर्गा माता से शेर के रूप में लड़ाई की कभी हाथी के रूप में लड़ाई की, तो कभी जंगली भैसे का रूप धारण किया

लेकिन माता दुर्गा ने उसकी सेना को चीर कर रख दिया, और 9 दिन की लड़ाई के बाद दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया, सारे ब्रह्मांड में इस विजय को मनाया गया और यह दिवस विजयदशमी की तरह मनाया जाने लगा |

9 दिन की लड़ाई के कारण विजय विजयदशमी को “नवरात्रि” भी कहा जाने लगा, विजय की प्राप्ति दसवे दिन हुई तो इसे “दशहरा” भी कहा जाने लगा, दुर्गा और उसके सारे अवतार और उसके सारे रूपों को भी पूज्य माना जाने लगा |

बंगाल में दुर्गा की मूर्ति को पंडाल में पूजा जाने लगा और बड़े त्यौहार की तरह मनाया जाने लगा, दशहरा मैसूर की चामुंडेश्वरी मंदिर में एक भव्य त्यौहार की तरह मनाया जाने लगा,

ये भी माना जाता है कि “श्री राम” ने रावण को भी इसी दिन पराजित करते हुए मृत्यु के घाट उतार दिया |पुरे भारत में “रामलीला” के माध्यम से श्री राम और रावण के बीच लड़ाई को दर्शाया जाता है,

“महाभारत्” में इस दिन पांडवों ने अज्ञातवास पूरा किया, उन्हें शस्त्र धारण करने का आदेश दिया गया, दोस्तों क्या आपको मालूम है कि हमारे अंदर ही भगवान है और हमारे अंदर ही राक्षस की है |

“यदि हम बुराई पर नियंत्रण रखें और अच्छाई उजागर करे, तो उसी दिन विजय दशमी और यही विजयदशमी का सार हैं, विजयादशमी मतलब बुराई पर अच्छाई की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत” |

तो दोस्तों अब आपको पता चल गया होगा की (Know why the festival of Dussehra is celebrated?) दशहरा पर्व क्यों मनाया जाता है ? और इसके पीछे के महत्त्व के बारे में |

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