Motivational Story For Student In Hindi

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Hello दोस्तों आप सभी का स्वागत है आज मैं आप लोगो को इस पोस्ट में Motivational Story For Student In Hindi – Positive Thinking, की Story बताने जा रहा हु, दोस्तो यह ऐसी कहानी हैं जो आप लोगो को जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी ।

तो चलिए दोस्तों इस Motivational Story For Student In Hindi – Positive Thinking, कहानी की शुरुआत करते हैं और जिंदगी में आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं, दोस्तों इस स्टोरी को आखिरी तक सुनिए ताकि आपको पूरी तरह से समझ में आए कि अपने माइंड को पॉजिटिव रखने से पहले हमें क्या करना चाहिए ।


Motivational Story For Student In Hindi – Positive Thinking

बहुत समय पहले की बात हैं एक बहुत बड़ा राज्य था,राज्य का नाम प्रतापगढ़ था और उस राज्य में एक राजा था जो बहुत ही बलवान, बुद्धिमान और निडर था वह अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता था उसके लिए प्रजा ही सब कुछ था, राजा के पास चार घोड़े थे जो बिल्कुल ही Untrained घोड़े थे इन घोड़ों को कोई भी ट्रेन नहीं कर पाया |

एक दिन राजा ने कहा जो भी घोड़ों को ट्रेन कर सकेगा उन्हें एक बहुत बड़ा इनाम मिलेगा लेकिन जैसे ही कोई भी घोड़े को हाथ लगाता घोड़ा उसे खींच कर फेंक देता, बहुत लोगों ने कोशिश की और कई लोगों की हड्डियां भी टूट गई, एक दिन एक जवान आदमी आया जिसका नाम सूरज था उसने राजा से कहा

 

सूरज ने कहा – महाराज मैं इन घोड़ो को ट्रेन कर सकता हूं आप मुझे एक मौका दीजिये |

राजा ने कहा – बहुत लोगों ने कोशिश की है और उन्होंने अपनी हड्डियां भी तुड़वा दी है लेकिन कोई भी अब तक घोड़े को ट्रेन करने में कोई भी सफल नहीं हुआ है |

सूरज ने कहा – मुझे पूरा यकीन है कि मैं घोड़ों को ट्रेन कर सकता हूं लेकिन मेरी एक शर्त है इन घोड़ों को मैं अपने पास ही रखूँगा जब तक यह पूरी तरह से ट्रेन नहीं हो जाते |
राजा ने कहा – ठीक है |

हफ्ते निकल गए, महीने निकल गए और 1 साल निकल गया लेकिन वह आदमी वापस नहीं आया ।

राजा ने कहा – इन घोड़ो को भूल जाओ क्योंकि यह अब कभी वापस नहीं आएंगे, घोड़े अब तक ट्रेनर को छोड़कर भाग चुके होंगे |

लेकिन कुछ देर बाद उसने घोड़ों की आवाज सुनी और उसने देखा कि उसके चार घोड़े शांति से एक ही लाइन में सूरज के साथ आगे बढ़ रहे थे, राजा यह देखकर बहुत खुश हुआ की घोड़े ट्रेन हो चुके हैं ।

राजा ने सूरज से पूछा – मुझे बताओ तुमने इन्हें ट्रेन कैसे किया और तुमने इतना टाइम क्यों लगाया ?

सूरज ने कहा – जब मैं घोड़ों को ले गया मैंने उन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया ताकि वह जो करना चाहे कर सके और उनके साथ में भी वही करने लगा जो वो कर रहे थे, जब वो भागते तो मैं भी उनके साथ भागता था जब वह सोते थे तो मैं भी उनके साथ सोता था जब वह खाना खाते थे तो मैं भी उसी वक्त अपना खाना खाता था |

सूरज ने कहा – इसी तरह घोड़े सोचने लगे कि मैं उनके साथ पांचवा घोड़ा हूं कुछ समय बाद मैंने घोड़ों की पीठ पर सीट रखा लेकिन उन्हें पसंद नहीं आया और उन्होंने सीट खींचकर निकाल दिया लेकिन लगातार कोशिश करने के बाद धीरे-धीरे उन्हें सीट की आदत पड़ गई |

सूरज ने कहा – उसके बाद मैंने उन्हें बेल्ट पहनाया वह भी उन्हें पसंद नहीं आया और उन्होंने खींचकर निकाल दिया लेकिन कुछ दिनों के बाद उन्हें बेल्ट की भी आदत हो गई इसी तरह से धीरे-धीरे मैं उनका दोस्त बन गया और मैं उन्हें ट्रेन कर पाया, दूसरों ने गलती यह की कि वह पहले ही दिन से उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे थे बिना उनसे दोस्ती करें |


ठीक इसी तरह हमारे अंदर भी चार अनट्रेंड घोड़े हैं और वह है मानस, बुद्धि, चिंता और अहंकार और जब हमें इन में से किसी एक को कंट्रोल करना है हम उसी वक्त उन पर पूरी तरह से कंट्रोल करना चाहते हैं जिसका मतलब है, एक ही मिनट में खुद के मास्टर बनना चाहते हैं बिना खुद पे कोई काम किए |

हम इन चार घोड़ों को बहुत जल्दी कंट्रोल करना चाहते हैं और यही वजह है कि हम अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाते, उन चार घोड़ों में से एक घोड़ा हमसे जब भी कहता है आओ बैठकर घुड़सवारी करते हैं और जैसे ही हम घोड़े पर बैठने हैं थोड़ा हमें गिरा कर फेंक देता है |

और फिर जाने के बाद कोई दूसरा घोड़ा फिर से हमसे कहेगा आओ मेरी पीठ पर बैठो और फिर से हमें गिरा देगा इन सब का मतलब क्या है ? इसका मतलब यह है कि हमें पहले अपने मन से दोस्ती करनी पड़ेगी और वह करने के बाद ही हमारा मन हमारी बात सुनना शुरू करेगा |

जब तक हमने अपने मन से दोस्ती नहीं की है हम हमेशा ही स्ट्रगल करते रहेंगे अपने मन के साथ और यही कारण है कि बहुत लोग योगा, प्राणायाम या स्पिरिचुअलिटी में जाकर भी अपने मन को कंट्रोल करने में सफल नहीं हुए क्योंकि उनका अहंकार उनके मन से पहले दोस्ती करने नहीं देता |

तो इसीलिए हमारे जो चार घोड़े हैं मानस, बुद्धि, चिंता और अहंकार से हमें उनसे पहले दोस्ती करनी पड़ेगी और उसके बाद ही हम अपने मन के साथ खुश रहना सीख सकेंगे |

पॉजिटिव थिंकिंग हमें यह कहता है कि अपने मन से पॉजिटिव बात करो लेकिन हर किसी के लिए पॉजिटिव थिंकिंग काम नहीं करता है और कभी हम अपने आप को पॉजिटिव थिंकिंग से समझा सके और कभी शायद ना समझा सके |

इसकी वजह यही है कि हमने अपने मन से दोस्ती नहीं की है तो जब आपका मन आपकी बात नहीं माने उसे पहले अपना दोस्त बनाई है उसे चाय पिलाइये या आइसक्रीम खिलाईये, कहने का मतलब यही है कि अपने मन से एक दोस्त की तरह बात करिये और फिर आपका मन आपकी बात बेहतर समझ में लगेगा |


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