New Moral Stories In Hindi | घमंड किस बात का है

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नमस्कार दोस्तों मैं अंकिता आप सभी का स्वागत करती हूँ एक नये और रोचक कहानी में जिसका नाम है – घमंड किस बात का है (New Moral Stories In Hindi) | यह एक शिक्षाप्रद कहानी है जसे पढ़ने के बाद आप अपनी ज़िन्दगी में घमंड करना छोड़ देंगे | दोस्तों यह एक Short Story है जो आपको बहुत पसंद आयेगा |

तो चलिये दोस्तों इस छोटी सी कहानी को शुरू करते है |


घमंड किस बात का है (New Moral Stories In Hindi)

एक बार की बात है एक संत चार धाम की यात्रा को निकले थे | बहुत पहले वाहन नहीं हुआ करता था तो लोग पैदल चलकर ही जाते थे और भगवान का नाम लेकर सच्ची श्रध्दा से यात्रा करते थे ।

संत भी पैदल निकले थे वह कभी नदी पार करके आगे बढ़ता तो कभी पहाड़ पर चढ़कर जाता यदि थकावट लगती तो पेड़ के नीचे आराम करता उसके बाद भगवान का नाम लेकर फिर अपनी यात्रा फिर से शुरू करता ।

एक दिन जब संत यात्रा कर रहे थे तो वह बहुत थक चूका था आसपास देखा तो रुकने लायक कोई जगह नहीं थी फिर उसने अपनी यात्रा जारी रखी और फिर कुछ ही दूर में उसे एक गांव दिखाई दिया | वह उस गांव में अमरदास नाम के एक व्यक्ति के घर ठहरा ।

अमरदास ने उस संत की खूब सेवा की, जब तक संत अमरदास के घर में थे तब तक अमरदास ने उसकी सेवा निःस्वार्थ सेवा भाव से की | उसने सच्ची श्रद्धा से संत की सेवा ।

और जब संत ने अपनी फिर से शुरू करने के लिये अमरदास से विदा माँगा तो अमरदास ने यात्रा में काम आने वाली बहुत सी चीजें देकर उन्हें विदा किया | संत अमरदास के सेवा सत्कार से बहुत खुश थे और अमरदास को आशीर्वाद दिया |

संत : “भगवान करे तुम दिन प्रतिदिन दिन बढ़ते रहो और तरक्की करते रहो ।”

यह सुनकर अमरदास जोर से हंसा और बोला

अमरदास : अरे बाबा, जो है वह भी तो यहां रहने वाला नहीं है क्योकि जिंदगी में क्या होगा किसी को कुछ पता नही |

यह सुनकर वह संत मुस्कुराया और वहां से चला गया | फिर धीरे-धीरे संत ने अपनी यात्रा पूरी की । कई महीनों बाद यात्रा से लौटते समय वह संत फिर से उसी गांव से गुजरा और अमरदास से मिलने उसके घर गया | अमरदास का सारा वैभव समाप्त हो चुका था, वह पहले जैसा नही था अब वह गांव के मुखिया के यहां नौकरी करने लगा था |

अमरदास संत को देखकर बहुत खुश हुआ | और उसने अपनी स्थिति खराब होने के बावजुद उस संत की खूब सेवा की | खुद जमीन पर सो कर संत को सोने के लिए चारपाई दी और खुद भूखा रहकर संत को भोजन कराया ।

यह सब देखकर संत की आंखों में आंसू आ गए और वह बोला

संत : हे प्रभु ये आपने क्या किया

अमरदास फिर हंसा और उस संत से बोला

अमरदास : बाबा आप क्यों दुखी हो रहे हो महापुरुषों ने कहा है की भगवान, इंसान को जिस हाल में रखे उसे भगवान को धन्यवाद देकर खुश रहना चाहिए समय बदलता रहता है आप दुखी ना हो यह समय भी सदा नहीं रहेगा ।

संत ने सोचा मैं तो केवल भेश का साधु हूं सच्चे संत तो तुम हो अमरदास ।

फिर धीरे-धीरे समय बीतता गया देखते-देखते चार साल बीत गए । चार साल बाद उसी संत का उस गांव से फिर से जाना हुआ | संत यह देखकर हैरान हो गया कि अमरदास तो अब जमींदारों का भी जमींदार बन गया है |

संत को पता चला कि अमरदास जिन मुखिया के यहाँ काम करता था उनकी कोई संतान नहीं थी तो मरते वक्त मुखिया ने अपनी सारी जायदाद अमरदास के नाम कर गए ।

संत यह जानकर बहुत खुश हुए और उन्होंने अमरदास से कहा

संत : अच्छा हुआ वह समय गुजर गया भगवान करें अब तुम यूं ही बने रहो |

यह सुनकर अमरदास फिर हंसा और संत से बोला

अमरदास : बाबा अभी भी आप की नादानी यूं ही बनी है |

संत ने इस बार पूछा

संत : क्या यह भी रहने वाला नहीं है अमरदास ?

तो अमरदास ने जवाब दिया

अमरदास : या तो ये चला जायेगा, या तो इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा कुछ भी तो यहां रहने वाला नहीं है ।

यह सुनकर वह संत मुस्कुराये और वहां से चले गए | और कुछ सालों बाद संत फिर उसी गांव से गुजरे तो वह देखते हैं कि अमरदास का महल तो है पर वहां सन्नाटा छाया है और अमरदास की बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है और अमरदास यह दुनिया छोड़कर जा चुका है ।

यह देखकर संत ने सोचा अरे इंसान तो किस बात पर घमंड करता है, क्यों इतना इतराता है यहां तो कुछ भी टिकने वाला नहीं है दुःख हो या सुख सदा कुछ भी नहीं रहेगा | सच्चे इंसान तो वह है जो हर पल में खुश रहते हैं |

Moral of This Story

दोस्तों इस जिंदगी का कोई भरोसा नही है | यह जिंदगी तराजू के दो पहलू जैसा है कभी झुकाव आपके तरफ ज्यादा तो कभी कम | जिस दिन झुकाव आपके तरफ ज्यादा हो तो गुरुर या घमंड मत करना और जिस दिन झुकाव आपके तरफ कम है उस दिन सब्र कर लेना ।

फिर मिलेंगे दोस्तों अगली कहानी के साथ तब तक के लिए अपना ख्याल रखना और हमेशा मुस्कुराते रहिये |


तो दोस्तों ये तो थी हमारी New Moral Stories In Hindi

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