Panchtantra Ki Kahani In Hindi | चार ब्राम्हण की कहानी

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Hello फ्रेंड्स मैं अंजलि आप सभी का स्वागत करती हूँ आपके अपने Story In Hindi वेबसाइट में | इस वेबसाइट में ये मेरी पहली कहानी है और आज मैं आपको एक बहुत ज्ञानवर्धक Panchtantra Ki Kahani In Hindi ( चार ब्राम्हण की कहानी ) सुनाने जा रही हूँ |

इस कहानी के माध्यम से आपको पता चलेगा की हमें कभी भी अपनी विद्या पर घमंड नहीं करना चाहिये|

ये एक  बहुत छोटी सी कहानी (Short Story) है तो चलिये मैं इस कहानी की शुरुवात करती हूँ |


Panchtantra Ki Kahani In Hindi | चार ब्राह्मण की कहानी

गांव में चार ब्राह्मण रहते थे उनमें से तीन ब्राह्मणों ने अनुखी की विद्या सीख रखी थी | जबकि एक को कुछ खास नहीं पता था इसी वजह से बाकी तीनों उसे अज्ञानी और मूर्ख समझते थे |

एक बार तीन विद्वान ब्राह्मणों ने शहर जाकर कुछ धन उपार्जन करने का विचार बनाया | उन्हें जाता देखकर चौथा ब्राह्मण भी उनके साथ जाने का आग्रह करने लगा |

तभी एक ब्राम्हण बोला तुम हम विद्वानों के साथ जाकर क्या करोगे तुम्हें तो कोई ऐसी विद्या भी नहीं आती जिससे तुम धन उपार्जन कर सको तुम यहा से लौट जाओ | तीनों ब्राम्हण उसे डांटते हुए कहा तुम हमारे साथ नहीं जा सकते |

चौथे ब्राम्हण ने आग्रह करते हुए कहा मैं तुम तीनों का काम कर दिया करूंगा कृपया मुझे ले चलो | तीनों ब्राम्हणों ने काम कराने की लालच में उसके बात को मान गए और वह भी साथ-साथ चल पड़ा |

रास्ते में एक घना जंगल पड़ा चलते-चलते उन्हें एक जगह ढेर सारी हड्डियां बिखरे दिखाई पड़ती है | सभी वही रुक जाते हैं और इस बात को लेकर विवाद हो जाता है कि हड्डियों जानवर की है | तभी एक ब्राम्हण बोलता है चलो बेकार की बहस बंद करो मैं अभी अपनी तंत्र विद्या से इन हड्डियों को जोड़ देता हूं |

और देखते ही देखते एक शेर कंकाल तैयार हो जाता है | यह देख दूसरा ब्राह्मण अपनी विद्या का प्रदर्शन कर सबको प्रभावित करना चाहता है और उस कंकाल में मांस चमड़ी लगा देता है |

और भला तीसरा ब्राह्मण कहां पीछे रहने वाला था हंसते हुए बोला तुम सब यह क्या बचकानी हरकतें कर रहे हो मैं दिखाता हूं असली विद्या मैं शेर में अभी प्राण फूंक इसे जीवित कर देता हूं | और ऐसा कहकर वह मंत्र उच्चारण करने लगता है |

तभी चौथा ब्राम्हण जोर से चिल्लाता है और बोलता है ये तुम क्या करने जा रहे हो ! “अगर शेर जीवित हो गया तो” अभी चौथा ब्राम्हण अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाता है कि मंत्रोच्चारण कर रहा ब्राह्मण उसपर गरज पड़ता है और बोलता है मूर्ख अल्प बुद्धि विद्वानों के बीच अपनी जुबान दुबारा मत खोलना |

और इतना कहकर वह पुनः मंत्र पढ़ने लगता है |

चौथा ब्राम्हण समझ जाता है यहां कोई उसकी बात नहीं मानेगा और वह तेजी से भागकर एक पेड़ पर चढ़ जाता है | उधर मंत्र की शक्ति से शेर में प्राण आ जाती है | ( शेर तो शेर होता है हिंसक, घातक और प्राणनाशक वह क्या जाने उसे किसने बनाया और क्यों बनाया वह तो बस मरना और खाना जनता है )

देखते ही देखते शेर ने तीनों ब्राह्मणों को मार डाला और अपना पेट भर घने जंगल ओझल हो गया | चौथा ब्राह्मण सही समय देखकर गांव की तरफ वापस लौट गया मन ही मन सोच रहा था ऐसा ज्ञान किस काम का जो इंसान की सुझबुझ और समझदारी को छीन कर दे |

दोस्तों हमें कभी भी अपनी पढ़ाई लिखाई का घमंड नहीं करना चाहिए और अपने आगे दूसरों को मूर्ख नहीं समझना चाहिए |

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