Panchtantra Ki Kahani – ईमानदारी और मेहनत का फल

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आज मैं आपको Panchtantra Ki Kahani बताऊंगा की कैसे एक मजदूर अपने काम को पूरी लगन और मेहनत से करता है जिससे उसे उसके काम का ईनाम मिलता है इस कहानी के पीछे छिपी नैतिक ज्ञान आपको अपने कार्य को समय पर पुरा करने को प्रेरित करेगी |

अपने कार्य को लगन से करना

बहुत समय पहले की बात है जगनपुर गांव में तिलक नाम का एक पेंटर रहता था तिलक बहुत ईमानदार था किंतु बहुत गरीब होने के कारण वे घर – घर जाकर पेंट का काम किया करता था उसकी आमदनी बहुत कम थी बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी सिर्फ दो वक्त की रोटी ही जुटा पाता था |

वह हमेशा चाहता था कि उसे कोई बड़ा काम मिले जिससे उसकी आमदनी अच्छी हो और अपने बीवी बच्चों का की परवरिश अच्छे तरह से कर पाए, लेकिन उसे बड़ा काम नहीं मिल रहा था | पर वह छोटे – छोटे काम भी बड़ी लगन और ईमानदारी से करता था |

एक दिन उसे गांव के साहूकार ने तिलक को बुलाया और कहा मैंने तुम्हें यहां एक बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है क्या तुम वह काम करोगे | तिलक बोला जरूर करूंगा मालिक साहूकार बोला मेरी नाव पेंट करनी और यह काम आज ही हो जाना चाहिए, अरे वह सब तो ठीक है पर तुम पहले यह तो बताओ इस काम के पैसे कितने लोग हैं |

तिलक बोला मालिक बाकी आपको जो पसंद हो दे देना साहूकार बोला काम अच्छा होना चाहिए | तिलक बोला आप चिंता मत कीजिए आपको काम बढ़िया ही मिलेगा | साहूकार उसे अपनी नाव दिखाने नदी किनारे ले जाता है नाव देखने के बाद तिलक साहूकार से थोड़ा समय मांगता है और अपना रंग का सामान घर चला जाता है |

सामान लेकर जैसे ही तिलक आता है वह नाव को रंगना शुरू कर देता है जब तिलक नाव को रंग रहा था तो उसने देखा की एक ओर छेद है | तिलक ने सोंचा अगर इसे ऐसे ही पेंट कर दूंगा तो यह पानी भरने से डूब जाएगी पहले इस छेद को ही भर देता हूं | ऐसा कह कर तिलक छेद को भर देता है और नाव को पेंट कर देता है |

फिर साहूकार के पास जाता है और कहता है मालिक आपका का काम पूरा हो गया अब आप चल कर देख लीजिए | फिर दोनों नदी किनारे पहुंच जाते हैं नाव को देखकर साहूकार बोलता है नाव को तो तुमने बहुत अच्छे से पेंट किया है ऐसा करो तुम कल सुबह आकर अपना मेहनताना ले जाना ठीक है | और फिर दोनों अपने – अपने घर चले जाते हैं |

उसी दिन साहूकार के परिवार वाले उसी नाव में बैठकर नदी में घूमने जाते हैं | कुछ समय बाद साहूकार का नौकर भीमा जो उसकी नाव की देख रेख करने का काम करता था छुट्टी से वापस आता है और परिवार को घर पर ना देखकर साहूकार से परिवार वालों के बारे में पूछता है साहूकार उसे सारी बात बताता है साहूकार की बात सुनकर भीमा चिंता में पड़ जाता है |

भीमा को चिंतित देखकर साहूकार पूछता है क्या हुआ भीमा यह बात सुनकर तुम चिंतित क्यों हो गए भीमा कहता है सरकार लेकिन उस नाव में तो छेद था भीमा की बात सुनकर साहूकार भी चिंतित हो जाता है | तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती करके वापस आ जाते हैं उन्हें सकुशल देखकर साहूकार चैन की सांस लेता है |

फिर अगले दिन साहूकार तिलक को बुलाता है और कहता है | मैं बहुत खुश हूं तिलक पैसे लेकर गिनता है तो हैरान हो जाता है क्योंकि वह पैसे ज्यादा थे साहूकार से कहता है मालिक आपने मुझे गलती से ज्यादा पैसे दे दिए हैं हमारे बीच तो 1000 की बात हुई थी यह तो 4000 है तो फिर यह मेरी मेहनत का कैसे हुआ ?

साहूकार कहता है तिलक तुमने बहुत बड़ा काम किया है तुमने इस नाव के छेद को भर दिया जिसके बारे में मुझे और मेरे परिवार वालों को पता भी नहीं था अगर तुम चाहते तो उसे ऐसे भी छोड़ सकते थे या फिर उसके लिए अधिक पैसे भी मांग सकते थे पर तुमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया जिसकी वजह से मेरे परिवार वाले सुरक्षित उस नाव की सवारी कर सकें अगर तुम उस छेद को ना भरते तो मेरे परिवार वाले नदी में डूब भी सकते थे |

आज तुम्हारी वजह से वह सुरक्षित है इसलिए यह पैसे तुम्हारी मेहनत और ईमानदारी के हैं | तिलक बोलता है फिर भी छेद को भरने के इतने पैसे तो नहीं बनते, साहूकार कुछ मत कहो यह पैसे तुम्हारे ही है मेरे परिवार वालों की जान से बढ़कर नहीं है | साहूकार की बात सुनकर और पैसे लेकर तिलक बहुत खुश हुआ और कहने लगा बहुत – बहुत धन्यवाद साहूकार साहब ऐसा कहकर वे खुशी – खुशी वहां से चला गया |

Moral of story

इस कहानी से हमें यह नैतिक शिक्षा मिलती है कि हमें अपने काम को हमेशा पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए |

तो दोस्तों ये तो थी Panchtantra Ki Kahani अपने देखा की कैसे तिलक ने अपना काम पुरी लगन से किया तो उसे उसका हेमनताना भी थोड़ा ज्यादा मिला | ऐसे ही Panchtantra Ki Kahani पढ़ने के लिए हमारे वेबसाइट को बुकमार्क करके जरुर रखे और अपने राय हमें देने के लिये हमें कमेंट करके जरुर बताये |

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