Pariyon Ki Kahaniyan | खुबसूरत परी और जादुई पौधा

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हेलो दोस्तो मेरा नाम श्रद्धा है आज मैं आप लोगो को Pariyon Ki Kahaniyan (खुबसूरत परी और जादुई पौधा) की कहानी बताने जा रही हूँ |

दोस्तों जब मैं दस साल की थी तब मेरी दादी ने मुझे यह कहानी सुनाई थी, लेकिन अब मैं 25 साल की हो गई हूं| इस कहानी को मैं अभी भी नही भूली हूँ क्योकि इस कहानी से मुझे कुछ सीख मिली थी | अब वो क्या सीख मिली हैं वो मैं आपको इस कहानी के माध्यम से बताउंगी ।

तो चलिए दोस्तो इस मजेदार Pariyon Ki Kahaniyan (खुबसूरत परी और जादुई पौधा), कहानी की शुरुआत करते है ।


Pariyon Ki Kahaniyan | खुबसूरत परी और जादुई पौधा

जामपुर नाम का एक छोटा सा गांव था यह गांव शहर से दूर जंगल के बीच मे था ज्यादातर उस गांव में गरीब लोग रहते थे | सभी लोग रोज़ी मजदूरी करके अपनी जिंदगी चलाते थे और गांव के सभी लोग मिलजुल कर रहते थे जरूरत के समय सभी एक दूसरे का साथ देते थे सभी अपनी जिंदगी से खुश थे ।

उसी गांव में भुवन नाम का एक लड़का रहता था वह चरवाहा था वह सुबह गांव के जानवरों को चराने के लिए जंगल मे ले जाता था | भुवन बहुत ही शांत स्वभाव का था |

एक दिन भुवन जब जानवरो को चराने के लिऐ जंगल गया था तभी तेज़ हवाएं चलने लगी, इन तेज़ हवाओ के कारण भुवन के ऊपर एक पेड़ की टहनी गिर गया उसे बहुत जोरो से चोट जिसकी वजह से वह बेहोश हो गया ।

हवा शांत होने के बाद आसमान से उड़ते हुए एक बहुत ही खूबसूरत परी आई जिसका नाम ब्यूटी परी थी | वह अपने खूबसूरत पंख से उड़ते हुए जमीन पर आई तभी उसने भुवन को बेहोश पड़ा हुआ देखा ।

ब्यूटी परी ने अपनी जादुई छड़ी से एक जादुई पौधा बनाई फिर उस पौधे से भुवन को ठीक कर दिया | भुवन फिर से चंगा हो गया, ठीक होने के बाद जैसे ही भुवन ने परी को देखा वह आश्चर्यचकित रह गया और बोला आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप बहुत ही खूबसूरत हो और आपके पंख भी बहुत ही खूबसूरत है, आप कौन है ?

तभी ब्यूटी परी ने कहा मैं एक परी हूँ अक्सर मै धरती लोक पर घूमने आया करती हूं | फिर भुवन ने कहा आपने मुझे ठीक कैसे किया ? तभी परी ने कहा मैंने जादुई पौधे से तुम्हे ठीक किया ।

फिर भुवन ने कहा क्या आप मुझे वो जादुई पौधा दे सकती हो ?  फिर ब्यूटी परी ने कहा तुम इसका क्या करोगे, फिर भुवन ने कहा मेरे गांव में कोई डॉक्टर नही है, मैं इस जादुई पौधे से गांव वालों का इलाज करूँगा ।

फिर ब्यूटी परी कहती है यह पौधा मै तुम्हे दे दूंगी किंतु तुम लोगो का इलाज निःस्वार्थ भाव और बिना किसी लालच के करोगे | यदि तुमने इस पौधे को अपना धन कमाने का जरिया बनाया तो मैं इसे तुमसे ले लुंगी | भुवन कहता है मैं कसम खाता हूं काम के बदले किसी से एक भी पैसा नही लूंगा ।

फिर ब्यूटी परी भुवन के ऊपर विश्वास करके वह पौधा दे देती है | भुवन बहुत खुश हो जाता है फिर उस दिन के बाद से यदि गांव में कोई बीमार पड़ता तो भुवन तुरंत उसे ठीक कर देता ।

एक दिन गांव में अजीब घटना घटी एक महिला घर मे खाना बना रही थी तभी अचानक से उसके कपड़ें में आग लग गई वह बुरी तरह जल गई थी | फिर गांव के लोगो ने भुवन को बुलाया और भुवन ने जादुई पौधे से ठीक कर दिया | अब भुवन की चर्चाएं सब तरफ फैल रही थी ।

गांव से दूर एक शहर में राजा रहता था उसकी एक बेटी थी जो बहुत दिनों से बीमार थी कई जगह इलाज कराने के बावजूद उसकी बेटी ठीक नही हो रही थी | फिर एक दिन राजा को भुवन के बारे में पता चला तो उसने अपनी बेटी को भुवन के पास ले गया | भुवन ने उसकी बेटी को जादुई पौधे से तुरंत ठीक कर दिया ।

राजा बहुत प्रसन्न हुआ और कहा भुवन ये मैं आपका एहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा, आपके उपचार के बदले क्या दूं, फिर भुवन ने कहा नही महाराज मुझे कुछ नही चाहिए मैं निःस्वार्थ भाव से लोगो की सेवा करता हूँ ।

लेकिन फिर भी राजा प्रसन्न होकर भुवन को बहुत सारे धन दे दिये | भुवन यह देखकर चकराया और मन मे सोचा इस इलाज से तो मै बहुत सारे धन कमा लूंगा अब मै कल से जो भी इलाज के लिए आयेगा उससे मैं धन लूंगा | अब वह गरीब नही रहना चाहता था, भुवन के मन मे लालच आ गया था ।

अब गांव से जो कोई भी इलाज के लिए आता तो वह बिना धन के इलाज नही करता था | धीरे-धीरे भुवन का स्वभाव बदलने लगा, उसके अंदर पैसा का घमंड आ गया था | अब वह मरीजो को लूटना शरू कर दिया था उसका लालच बहुत बढ़ चुका था ।

एक दिन एक गरीब महिला अपने पति को लेकर इलाज के लिए आई और बोली मेरे पति का इलाज कर दो, फिर भुवन ने कहा मैं बिना धन के किसी का इलाज नही करता जाओ तुम यहाँ से । महिला के रोने और गिड़गिड़ाने के बावजूद भी भुवन ने इलाज नही किया ।

उसी रात भुवन सोने के लिये लेटा उसे नींद नहीं आई, उसको डर था की जादुई पौधे को वापस लेने के लिए ब्यूटी परी न आ जाये फिर उसने उस पौधे को एक संदूक के अंदर ताला लगाकर रख दिया ।

फिर कुछ समय बाद ब्यूटी परी आई और अपनी जादुई छड़ी की शक्ति से संदूक खोली और जादुई पौधे को निकाल ली | इसके बाद भुवन बोला यह मुझे दो, यह मेरा है, मैं तुम्हे यह ले जाने नही दूंगा ।

फिर ब्यूटी परी ने कहा अब तुम इसके योग्य नही हो तुम्हारे अंदर स्वार्थ और लालच बढ़ गया है | यह कहते ही परी वह पौधा अपने साथ ले जाती है और धीरे-धीरे भुवन का धन खत्म हो जाता है | कुछ समय बाद भुवन फिर से अपनी पुराणी स्थिति में आ जाता है |

तो दोस्तों ये तो थी आज की कहानी मुझे पता है बहुत ही छोटी और सरल कहानी है और इसके अंदर छिपी नैतिक शिक्षा भी बहुत छोटी है किन्तु ये नैतिक शिक्षा जो समझ गया और अपने जीवन में लागु कर लिया वो बहुत बड़ा विद्वान है |

Moral of Story – नैतिक शिक्षा

इस Pariyon Ki Kahaniyan (खुबसूरत परी और जादुई पौधा) से हमें यह सीख मिलती है कि लालच एक बुरी बला है, लालची व्यक्ति अपनी जिंदगी में कभी खुश नही रह सकता ।

दोस्तों आपको ये कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरुर बताये और अगर आपके पास भी ऐसी कोई Short Story है तो आप वो हमसे शेयर कर सकते है हम वो कहानी आपके नाम से पोस्ट करेंगे और लोगों तक पहुंचाएंगे |

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