Pariyon Ki Kahani | एक लड़की और जादुई परी की कहानी

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हेल्लो दोस्तों मैं प्रिया शर्मा आपका फिर से स्वागत करती हूँ अपने Story In Hindi वेबसाइट में आज मैं प्रिया आपको एक नयी Pariyon Ki Kahani ( एक लड़की और जादुई परी की कहानी ) सुनाने जा रही हूँ |

हो सकता है आप में से कुछ लोगो ने ये कहानी पहले भी सुने होंगे लेकिन बहुत से लोग इस कहानी को पहली बार पढने या सुनने जा रहा होगा |

और मैं आशा करती हूँ आपको ये Pariyon Ki Kahani का संग्रह बहुत पसंद आ रहा होगा | और मैं ये भी आशा करती हूँ आपको ये कहानी भी बहुत पसंद आयेगा | तो चलिये दोस्तों आज की कहानी की शुरुवात करते है |


Pariyon Ki Kahani | एक लड़की और जादुई परी की कहानी

एक बार की बात है दूर देश में एक विधवा अपनी दो बेटियों के साथ रहती थी विधवा अच्छी महिला नहीं थी दिल से बेहद कठोर और स्वार्थी थी बड़ी बेटी उमा दिखने में और चरित्र दोनों में अपनी मां की छवि पर गयी थी |

लोग अक्सर उन दोनों में फर्क नहीं कर पाते थे वे दोनों समान रूप से घृणित थी और छोटी बेटी तारा ने अपने पिता के देहांत तक उनकी देखभाल की |

तारा अपनी जिंदगी में बहुत इमानदार थी और तारा ने अपने पिता से गुण लिए तारा बहुत विनम्र और शहर की सबसे सुंदर लड़की थी | तारा की इसी पहचान ने उसकी मां को पागल कर दिया क्योंकि वह तारा से नफरत करती थी |

और बस उमा से ही प्यार करती थी | उसकी माँ ने तारा से घर के सारे काम करवाएं जैसे वह नौकर हूं तारा को सुबह से शाम तक लंबे समय तक काम करना पड़ता था |

दिन के अंत में रसोई में अकेले भोजन करती थी तारा को एक और काम करना पड़ता था उसे पैदल चलकर घर के लिए पानी ले जाना पड़ता था | यह एक थका देने वाला काम था लेकिन तारा ने शिकायत नहीं की क्योंकि उसके पास कोई और विकल्प ही नहीं था |

एक दिन जब वो पानी के लिए बर्तन धो रही थी तभी अचानक एक बूढ़ी औरत उसके पास आई और पीने के लिए कुछ पानी की भीख मांगने लगी |

तारा ने जवाब दिया और झरने की सबसे साफ हिस्से से पानी से बर्तन को भर दिया फिर उसने बूढ़ी औरत को पानी पीने में मदद की | लेकिन तारा को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था वह तो एक परी से बात कर रही है |

उस बूढी औरत ने कहा मैंने आप जैसी लड़की कभी नहीं देखी आप कितनी दयालु और विनम्र है और बहुत सुंदर भी है आप इसके लिए उपहार के पात्र हैं |

इसलिए अब से हर बार जब आप बोलेंगे आपके मुंह से फुल या एक नगीना बाहर आएगा यह आपका उपहार है परी ने इन शब्दों को कहा और फिर अचानक हवा में गायब हो गई |

तारा को आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था | तारा इतनी हैरान थी कि वह 1 मिनट चुप रही तारा ने इतनी जल्दी पानी से अपना चेहरा धोया यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह कोई सपना नहीं देख रही है |

हां यह सच था तारा परी के बारे में सोचते हुए घर के रास्ते चल पड़ी जब वह घर पहुंची तो उसकी मां ने पानी लाने में देरी करने के लिए उसे बहुत डांटा |

तारा ने कहा माँ कृपया मुझे माफ कर दो मैं जितनी जल्दी से पानी ला सकती थी लेकर आई हूं तारा ने इन शब्दों को कहा और धीरे से उसके मुंह से दो फुल दो नगीने और दो हीरे गिर गए |

उसकी मां ने एक बार दिखा और उसका मुंह खुला का खुला ही रह गया | उसकी माँ ने कहा मेरी बेटी यह क्या हो रहा है ? क्या वे हीरे है ? जो तुम्हारे मुह से निकले |

यह पहली बार था जब उसने कभी तारा को अपनी बच्चे के रूप में देखा था | यह कैसे हुआ मुझे बताओ और तब तारा ने उसे बूढ़ी औरत के बारे में बताया जिस ने उससे पानी मांगा था और जिसने उसे उपहार भी दिया था | अगर तुम जो कह रही हो वह सच है तो तुम्हारी बहन को भी पानी भरने जाना चाहिए |

फिर उसने बड़ी बेटी को बुलाया उमा एक बार यहां आओ और देखो कि तुम्हारी बहन के मुंह से क्या निकल रहा है क्या तुम उसके जैसा उपहार पाना पसंद नहीं करोगी क्या |

तुम्हे उस झरने पर जाना चाहिए और इंतजार करना चाहिए जब तक कि कोई बूढ़ी महिला तुम से पानी ना मांगे | बिगड़ी हुई उमा ने घमंड से पूछा क्या मां क्या आप मुझसे काम करवाना चाहती है ?

उसकी माँ ने कहा मुझे यकीन है मैं तुम्हें बता रही हूं कि तुम्हें उस झरने में जाना है और तुम उस महिला को पानी पिलाओगी अब जाओ और हमारे पास से सबसे अच्छा बर्तन लेकर जाओ | उसकी मां लालच से भरी हुई थी और उसने अपनी बेटी को उपहार से अमीर बनने का रास्ता दिखाया |

उमा ने एक चांदी का बर्तन लिया और झरने की ओर निकल पड़ी वो काम करने से नफरत करती थी और क्योंकि वह बहुत बिगड़ी हुई थी तो रास्ता भी नहीं पता था अंत में जब वह जगह पर पहुंची तो एक सुंदर पोशाक में एक नारी जंगल से बाहर आई और उमा के पास पहुंची क्या मुझे कुछ पानी मिल सकता है |

यह वही परी जो तारा को दिखाई दी थी लेकिन इस बार उसने खुद को एक राजकुमारी के रूप में प्रकट किया और उमा को कुछ भी पता नहीं था |

उमा ने बहुत बेरुखी से जवाब दिया क्या आप अभी मुझसे मजाक कर रही है क्या अगर आपको लगता है मैं इस घटिया जंगल में इसलिए आई हूं कि आप जैसी राजकुमारी को पानी पिला सकूं तो आप बिल्कुल गलत है |

यदि आप कुछ पानी चाहिये तो इसे स्वयं पी ले | आपको क्या लगता है आप अपनी सुंदर पोशाक और सुंदर बालों के साथ मुझे आकर्षित कर सकती हो |

परी ने शांति से उत्तर दिया हे भगवान तुम विनम्र जवान लड़की तो बिल्कुल भी नहीं हो | और उमा के व्यवहार को गौर से देखा और कहा तुम फुल और हीरो की तो लायक नहीं हो |

लेकिन जब तुम बोलोगी तो सांप और मेंढक तुम्हारे मुंह से गिरेंगे “हां ऐसा ही होना चाहिए” परी ने अपना भयानक जादू किया और वापस जंगल में गायब हो गई | उमा घर वापस चली गई और वह उलझन में थी क्या हुआ था क्या सचमुच मेंढक उसके मुंह से निकलेंगे |

घर पहुंची तो उसकी मां ने उसे सवाल पूछना शुरू कर दिया उमा क्या तुमने परी को देखा ? क्या उसने तुम पर वैसा ही जादू चलाया जैसा उसने तुम्हारी बहन पर किया था ? बोलो ना तुरंत जवाब दो |

उमा ने कहा नहीं उसने ऐसा नहीं किया जैसे ही उमा बात की दो मेंढक और एक सांप उसके मुंह से गिर गया | उसकी माँ चौक गयी और बोली हे भगवान जी यह क्या हुआ तुम्हारी उस बहन की गलती है मैं उसे अभी बुलाती हूं |

और उसे वही मिलेगा जिसकी वह हकदार है उनकी मां तारा को खोजने के लिए दौड़ी लेकिन तारा तो जंगल में भाग गई थी जहां बैठ कर अक्सर रोती थी | अचानक तारा ने कुछ घोड़ों को अपनी ओर आते सुना और एक छन बाद शोर करने वाला व्यक्ति दिखाई दिया यह राजकुमार था |

उसने तारा से पूछा कि वह जंगल में अकेली क्या कर रही है और क्यों रो रही है ? तारा ने जवाब दिया मेरी मां ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया इसलिए मैं यहां छिप गई हूँ |

जैसे कि तारा बोल रही थी उसके मुंह से नीलम माणिक हीरे और को फुल गिर रहे थे राजकुमार उसके कोमल आवाज और सुंदरता को देखकर पिघल गया था |

उसे तारा से प्यार हो गया वह उसके गुण चकित था और इसलिए उसने उससे उसका हाथ मांगा | तारा को पता था कि राजकुमार एक बहुत अच्छा आदमी है इसलिए वह राजकुमारी बनने के लिए तैयार हो गई |

राजमुमार ने तारा अपने महल में ले गया और तारा अंत में भयानक परिवार से मुक्त हो गई | उन दोनों ने खुशी-खुशी जीवन व्यतीत किया और तारा ने शान के साथ राज्य पर शासन किया |

और आप सोच रहे होंगे कि उस दुष्ट मां और उमा के साथ क्या हुआ उन्हें छोड़कर सभी का सुखद अंत हुआ | बड़ी बेटी के साथ रहना इतना असंभव हो गया कि उसकी अपनी मां ने उसे घर से निकाल दिया |

और वह जंगल में भटक गई जहां भी बैठ जाती सांप और मेंढक फैलाती थी और वह बूढी विधवा अपने पूरे जीवन में किसी भी परिवार और धन के बिना पूरी तरह से अकेली रही |

Moral Of Story

Pariyon Ki Kahani | एक लड़की और जादुई परी की कहानी से हमें यह सीख मिलती है और विनम्र होना हमारे जीवन की शुरुआत में तो मुश्किल हो सकता है लेकिन ऐसे गुणों का फल हमें जरूर मिलता है और इसका मूल्य दुनिया के सभी नगीनो और हीरो से बहुत ज्यादा है |

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