Short Friendship Poetry in Hindi | नादान बचपन

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हेल्लो Friends आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने Story In Hindi वेबसाइट में आज हम आपके लिए एक छोटी कविता Short Friendship Poetry in Hindi – नादान बचपन लेके आये है | ये प्यारी सी कविता आपको आपके बचपन की याद दिला देगी |

ये कविता पूजा नेताम द्वारा लिखी गयी है जो आपको बहुत पसंद आयेगी | हमारी Story In Hindi की पूरी टीम पूजा नेताम का धन्यवाद करती है कि उसने अपनी कविता हमसे शेयर की |


Short Friendship Poetry in Hindi – नादान बचपन

कुछ पुरानी चीजों को आज देखा तो

बचपन की याद आ गयी,

कितना प्यारा था न वो बचपन

जहां झगड़े तो होते थे, पर दिल में कोई रंजिश नहीं

भूख तो होती थी, पर अकेले खाने की जिद नहीं

खेल अनोखा था उस बचपन का

कभी नाव बना पानी में बहाते थे तो

कभी तितली पकड़ उसके संग उड़ जाते थे

पेड़ों की टहनियों में बंधे वो झूले

लुका-छिपी के उस खेल में दिल आज भी

बच्चा बनकर झूमे,

कितनी सुकून दे जाती है बचपन की वो यादें

स्कूल जाते समय वो बगीचे से आम, अमरुद चुराना

दोस्तों को मार से बचाना, अपना टाई-बेल्ट दे देना

कहाँ खो गया न जाने, वो अनमोल सा बचपन

तोतली बातें, वो अल्हड़पन वो बेबाक बचपन

बचपन की यादों में आज फिर जीने का मन करता है

उन गुमनाम गलियों में आज फिर चलने का मन करता है

चल फिर पकड़े उन उड़ती तितलियों को

जाने फिर वो बचपन लौट आये

चल फिर से बैठें, क्लास की उस लास्ट बेंच पर

शायद फिर वो पुराने दोस्त मिल जाये |


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