Story Of Dusky Angel | सांवली परी की कहानी

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हेल्लो दोस्तों मैं प्रिया शर्मा आज आपको इस पोस्ट में मैं एक सांवली परी की बहुत ही सुन्दर कहानी (Story Of Dusky Angel)बताने जा रहा हु ये कहानी पढ़ने के बाद आप का मन प्रसन्नता से भर जाएगा और आपको शांति मिलेगी तो चलिए दोस्तों इस कहानी की शुरुआत करते है |

सांवली परी की कहानी (Story Of Dusky Angel)

बहुत पहले की बात है एक घर में चिंकी नाम की एक प्यारी और मासूम सी लड़की रहती थी और साथ में उसके परिवार वाले भी रहते थे चिंकी को कहानी सुनना बहुत ही अच्छी लगती थी चिंकी अक्सर सोने से पहले अपनी दादी के पास जाकर कहानी सुना करती थी |

फिर एक दिन चिंकी की दादी घुमने चली गई और बेचारी चिंकी को कोई कहानी सुनाने वाली नहीं थी चिंकी उस दिन बहुत उदास थी और वो यही सोच रही थी कि आज मुझे कहानी कौन सुनाएगा फिर जैसे ही रात हुई चिंकी रोतेरोते अपनी मम्मी के पास गई और बोली मम्मी आज मुझे कहानी कौन सुनायेया आज तो घर पर दादी जी नहीं है |

फिर मम्मी ने बड़े ही प्यार से उसके आंसू पोछे, फिर शांत कराई उसके सिर पर अपना हाथ रखा और गले से लगाई, फिर मम्मी ने चिंकी से बोली आज मैं आपको कहानी सुनाउंगी बेटा बोलो कौन सी कहानी सुनोगे, चिंकी खुश हो गई और बोली मम्मी आप मुझे कोई भी कहानी सूना दीजिये, फिर मम्मी बोली आज हम अपनी परी जैसी प्यारी बेटी को परियों वाली कहानी सुनायेंगे फिर मम्मी ने कहानी सुनाना शुरू किया |

परी लोक की सुन्दर दुनिया में बहुत ही सुन्दर परिया रहती थी और उसी लोक में करिश्मा नाम की बहुत ही सुन्दर परी भी रहती थी जो दिल की बहुत अच्छी थी और दुसरो की मदद भी करती थी लेकिन वह दिखने में सांवली थी, कुछ परिया उसके काले रंग के कारण उसे हेय दृष्टि से देखती थी और उसकी काले रंग के कारण मजाक भी उड़ाया करती थी |

उसी परी लोक में करिश्मा परी की एक सहेली थी जिसका नाम पिहू थी, पिहू परी दिखने में बहुत ही खुबसूरत थी और करिश्मा परी की सच्ची सहेली भी थी |

फिर एक दिन पिहू परी ने करिश्मा परी से बोली चलो आज पृथ्वी लोक की सैर करके आते है बहुत मजा आयेगा, फिर करिश्मा परी ने उदास मन से कहा पिहू आज मेरा दिल नहीं कर रहा है मेरी जाने की इच्छा नही है फिर कभी जायेंगे, फिर पिहू परी बोली चलो ना वहा तुम्हारा मन बहल जाएगा, पिहू परी के जिद करने पर करिश्मा परी जाने के लिए तैयार हो गई फिर दोनों ने रानी परी से आज्ञा ली और पृथ्वी लोक की तरफ उड़ चली |

फिर दोनों उड़ते – उड़ते पहाड़ के पास बहती हुई यमुना नदी के किनारे उतर गई, करिश्मा परी ने जैसे ही बहती हुई यमुना नदी की बहती हुई जल को छुआ उसकी शरीर में एक अजीब सी हलचल हुई और वो पीछे हट गई, पिहू परी ने पूछा क्या हुआ करिश्मा तुम ऐसे पीछे क्यों हट गई ?

करिश्मा परी ने कहा इस नदी को छूने से मेरे शरीर में कुछ अजीब सी हलचल हुई मैंने कुछ अलग ढंग की ताजगी महसूस कि इस जल को छूने के बाद मुझे ऐसा लगा की मेरे शरीर में कुछ परिवर्तन हुआ है पर ऐसा क्यों हुआ मुझे पता नहीं, फिर पिहू परी ने कहा ये पृथ्वी लोक का जल इसलिए तुम्हे ऐसा लगा होगा, फिर दोनों के बीच बातचीत चलती रही |

दोनों परियों के बीच बातचीत चल रही थी फिर अचानक घोड़े पर बैठकर एक राजकुमार आया वह राजकुमार बहुत ही बहादुर और सुशील था वह राजकुमार अपने घोड़े से उतरा और नदी के पास जल पीने लगा उसने जल पीकर अपनी प्यास बुझाई फिर अचानक से राजकुमार ने उन दोनों परियों को देखा और उसके पास जाकर बोला क्या आप लोग परी लोक से आये है, पिहू परी ने उत्तर दिया जी हां राजकुमार हम दोनों परिया परी लोक से आये है |

फिर करिश्मा परी ने देखा की राजकुमार के दाहिने काँधे से खून टपक रहा था, करिश्मा परी बोली राजकुमार आपके दाहिने काँधे से तो खून बह रहा है क्या आपको दर्द नहीं हो रहा है, राजकुमार ने कहा जब मैं घुड़सवारी के लिए निकला था तब रास्ते में एक शेर ने मुझ पर हमला कर दिया फिर हम दोनों के बीच मुठभेड़ हो गई फिर अंत में मैंने उसको भगा दिया |

राजकुमार को इस स्थिति में देख करिश्मा परी को बुरा लगा उसने तुरंत अपने जादू के सितारा छड़ी से राजकुमार का जख्म ठीक कर दिया, राजकुमार बोला आप का दिल से बहुत – बहुत धन्यवाद ये आपका उपकार मैं कभी नहीं भूलूंगा, आप दोनों का हमारे राज्य में बहुत – बहुत स्वागत है

आप दोनों हमारे मेहमान है यदि आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो हमें जरुर याद कीजिये हम आप लोगों की सहायता के लिए तैयार रहेंगे इतना कहकर राजकुमार घोड़े पर बैठकर वहा से चला गया फिर परिया भी वहा से उड़कर चली गई |

फिर उड़ते – उड़ते उनकी राह में एक कुटिया दिखाई दी वे दोनों वही रुक गये, कुटिया के अंदर से एक साधू महात्मा बाहर आया, दोनों परियों ने हाथ जोड़कर उस साधू महात्मा को प्रणाम किया, साधू ने दोनों को आशीर्वाद देते हुए कहा ईश्वर आप दोनों का कल्याण करें आप दोनों की सभी इच्छा पूर्ण हो |

साधू महात्मा ने दोनों परियों से कहा आप दोनों को देखकर ऐसा लगता है की पृथ्वी लोक पर घुमने आई हो आप दोनों सावधानी से रहिये क्योकि यहाँ कुछ चोर, लुटेरे भी है मेरी एक गाय और बछड़ा चुरा ले गये है |

यह सुनकर करिश्मा परी ने अपनी जादुई सितारा छड़ी को घुमाकर कहा साधू महात्मा जी की गाय और बछड़े जहा कही भी हो तुरंत यहाँ प्रस्तुत हो फिर महात्मा जी की गाय और बछड़ा दोनों सामने प्रस्तुत हो गया, ये चमत्कार देखकर साधू जी बहुत खुश हो गये और अपने कुटिया से बाहर आकर अपने कमण्डल से जल लेकर करिश्मा परी पर छिड़क दिया |

फिर अचानक चमत्कार हुआ करिश्मा परी का काला रंग गोरे रंग में बदल गया वह बहुत ही खुबसूरत हो गई, महात्मा जी ने करिश्मा परी से कहा मैंने आपका निस्वार्थ परोपकार देख लिया था आपने बिना अपने फायदे के राजकुमार के जख्म को ठीक किया और मेरे गाय और बछड़े को भी वापस लाया और मैं ये भी जानता हु की आपको एक साधू ने क्रोधित होकर काला बना दिया था लेकिन अब श्राप से मुक्त हो गई हो

करिश्मा परी ने महात्मा जी से कहा आपका बहुत – बहुत धन्यवाद मैं आपके इस असीम कृपा को कभी नहीं भूल पाउँगी फिर दोनों परिया साधू जी से आशीर्वाद लेकर अपने परी लोक चले गये |

तो दोस्तों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की यदि हम जरुरतमंदो की निस्वार्थ भाव से मदद करेंगे तो हमे उसका फल जरुर मिलता है  |

Pariyon Ki Kahani

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