The Moral Stories in Hindi | एक प्रेरणादायक कहानी

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Hello Friends मैं अंकिता आप सभी का एक बार फिर से स्वागत करती हूँ आपके अपने Story In Hindi वेबसाइट में आज मैं आपके दिल को छू जाने वाली The Moral Stories in Hindi बताने जा रही हूँ ये कहानी बहुत ही प्रेरणादायी है जिसे पढ़ने के बाद आपको अपने परिवार से और भी अटूट संबंध हो जायेगा |

एक कहानी एक परिवार की है जो आपको बहुत पसंद आयेगी | और हां दोस्तों ये कहानी हमें Aditi Gupta ने भेजी है जो चंडीगढ़ की रहने वाली है | हमारी Story In Hindi की पूरी Team उनका धन्यवाद करती है | चलिये The Moral Stories in Hindi को शुरू करते है |


The Moral Stories in Hindi

एक घर मे तीन भाई (ओम, जय और जगदीश) और एक बहन (मीरा) थी…बड़ा और छोटा पढ़ने मे बहुत तेज थे। उनके माँ बाप उन चारों से बहुत प्यार करते थे |मगर मझले बेटे से थोड़ा परेशान से थे। क्यूंकि वो पढ़ने में ठीक नहीं था और बहुत बदमाश भी था |

बड़ा बेटा पढ़ लिखकर डाक्टर बन गया। और छोटा भी पढ लिखकर इंजीनियर बन गया। मगर मझला बिलकुल अवारा और गंवार बनके ही रह गया। बड़े बेटे और छोटे की शादी हो गई । बहन की भी शादी हो गयी | बहन को छोड़ दोनों भाईयो ने Love मैरीज की थी।

बहन की शादी भी अच्छे घराने मे हुई थी। आखीर भाई सब डाक्टर और इंजीनियर जो थे। अब मझले को कोई लड़की नहीं मिल रही थी। मां बाप दोनों परेशान थे।

बहन जब भी मायके आती सबसे पहले छोटे भाई और बड़े भैया से मिलती। मगर मझले से कम ही मिलती थी। क्योंकि वह न तो कुछ दे सकता था और न ही वह जल्दी घर पे मिलता था।

वैसे वह मजदूरी करता था।

पढ़ लिख नहीं सका तो…नौकरी कौन देता। मझले की शादी कीये बिना बाप गुजर गये । माँ ने सोचा कहीं अब बँटवारे की बात न निकले इसलिए अपने ही गाँव से एक सीधी साधी लड़की से मझले की शादी करवा दी।

शादी होते ही न जाने क्या हुआ की मझला बड़े लगन से काम करने लगा ।

दोस्तों ने कहा… ए जगदीश आज अड्डे पे आना।

जगदीश – आज नहीं फिर कभी आऊंगा |

दोस्त – अरे तू शादी के बाद तो जैसे बिबी का गुलाम ही हो गया ?

जगदीश – अरे ऐसी बात नहीं । कल मैं अकेला एक पेट था तो अपने हिस्से की रोती कमा लेता था। अब दो पेट है आज कल और होगा।

जगदीश – घरवाले नालायक कहते थे, कहते हैं, मेरे लिए चलता है। मगर मेरी पत्नी मुझे कभी नालायक कहे तो मेरी मर्दानगी पर एक भद्दा गाली है। क्योंकि एक पत्नी के लिए उसका पति उसका घमंड, इज्जत, और उम्मीद होता है।

जगदीश – उसके घरवालो ने भी तो मुझपर भरोसा करके ही तो अपनी बेटी दी होगी…फिर उनका भरोसा कैसे तोड़ सकता हूँ । कालेज मे नौकरी के लिए डिग्री मिलती है लेकिन ऐसे संस्कार मा बाप से मिलते हैं ।

इधर घर पे बड़ा और छोटा भाई और उनकी पत्नीया मिलकर आपस मे फैसला करते हैं की…जायदाद का बंटवारा हो जाये क्योंकि हम दोनों लाखों कमाते है मगर मझला ना के बराबर कमाता है । ऐसा नहीं चलेगा ।

मां के लाख मना करने पर भी…बंटवारा की तारीख तय होती है । बहन भी आ जाती है मगर जगदीश है की काम पे निकलने के लिये बाहर आता है। उसके दोनों भाई उसको पकड़कर भीतर लाकर बोलते हैं की आज तो रूक जा? बंटवारा कर ही लेते हैं । वकील कहता है तुम्हें रुकना होगा । साईन करना पड़ता है।

जगदीश – तुम लोग बंटवारा करो मेरे हिस्से मे जो देना है दे देना । मैं शाम को आकर अपना बड़ा सा अगूंठा चिपका दूंगा पेपर पर ।

बहन- अरे बेवकूफ …तू गंवार का गंवार ही रहेगा । तेरी किस्मत अच्छी है की तुझे इतनी अच्छे भाई और भैया मिलें |

मां– अरे जगदीश आज रूक जा बेटा ।

बंटवारे में कुल दस बीघा जमीन मे दोनों भाई 5- 5 बीघा रख लेते हैं । और जगदीश को पुस्तैनी घर छोड़ देते है |

तभी जगदीश जोर से चिल्लाता है।

जगदीश – अरे???? फिर हमारी छुटकी का हिस्सा कौन सा है?

दोनों भाई हंसकर बोलते हैं अरे मूरख…बंटवारा भाइयों में होता है और बहनों के हिस्से में सिर्फ उसका मायका ही है ।

जगदीश – ओह… शायद पढ़ा लिखा न होना भी मूर्खता ही है। ठीक है आप दोनों ऐसा करो।

मेरे हिस्से की वसीएत मेरी बहन छुटकी के नाम कर दो।

दोनों भाई चकीत होकर बोलते हैं । और तू?

जगदीश मां की ओर देखके मुस्कुराके बोलता है मेरे हिस्से में माँ है न…… फिर अपनी पत्नी की ओर देखकर बोलता है..मुस्कुराके…क्यों जगदीशनी जी…क्या मैंने गलत कहा? जगदीशनी अपनी सास से लिपटकर कहती है। इससे बड़ी वसीएत क्या होगी मेरे लिए की मुझे मां जैसी सासु मिली और बाप जैसा ख्याल रखना वाला पति।

बस ये ही शब्द थे जो बँटवारे को सन्नाटे में बदल दिया । बहन दौड़कर अपने गंवार भैया से गले लगकर रोते हुए कहती है की..मांफ कर दो भैया क्योंकि मैं समझ न सकी आपको।

जगदीश – इस घर में तेरा भी उतना ही अधिकार है जीतना हम सभी का। बहुओं को जलाने की हिम्मत कीसी मे नहीं मगर फिर भी जलाई जाती है क्योंकि शादी के बाद हर भाई हर बाप उसे पराया समझने लगते हैं । मगर मेरे लिए तुम सब बहुत अजीज हो चाहे पास रहो या दुर।

जगदीश – माँ का चुनाव इसलिए किया ताकी तुम सब हमेशा मुझे याद आओ। क्योंकि ये वही कोख है जंहा हमने साथ-साथ 9 – 9 महीने गुजारे है। मां के साथ तुम्हारी यादों को भी मैं रख रहा हूँ।

दोनों भाई दौड़कर मझले से गले मिलकर रोते-रोते कहते हैं आज तो तू सचमुच का बाबा लग रहा है। सबकी पलको पे पानी ही पानी आ जाता है । सब एक साथ फिर से रहने लगते है।


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